क्योंकि ये अंदर की बात है!!
हाल की बाढ क़े कारण कूडा-कीचड़ ड्रेनेज में जमा है और पानी निकासी की क्षमता काफी घट गई है
सूरत। यदि सूरत में फिर जोरदार बारीश हो जाय, या कहिये एक ईंच बारीश एक घंटे में हो जाय तो शहर के कई ईलाके फिर जलमग् हो सकते हैं। यह केवल अटकल नहीं है, अपितु पालिका प्रशासन भी इस बात को लेकर चिंतित है कि स्ट्रोम ड्रेनेज सिस्टम की जल वहन क्षमता बाढ़ के बाद उसमें जमा कूड़ा-करकट और कीचड़ के कारण 50% कम हो गई है। सूरत महापालिका प्रशासन के अनुसार सूरत में अप्रत्याशित बाढ़ के कारण स्ट्रोम ड्रेनेज नेटवर्क में करीबन 3 फिट कीचड़ जम गई है।
सूरत महापालिका के अतिरिक्त सिटी इंजीनियर वी. डी. पटेल के अनुसार कीचड़ के कारण और कई जगहों से क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण स्ट्रोम ड्रेनेज सिस्टम की जल वहन क्षमता में काफी प्रतिकुल प्रभाव पडा है और इस कारण नदी में जल वहन की क्षमता घट गई है। प्रशासन के लिये इस कीचड़ को हटाना सिरदर्द साबित हो रहा है। एक अधिकारी के अनुसार बाढ़ के बाद बरसात न होने के कारण ड्रेनेज नेटवर्क में कीचड़ जम सा गया है और ऐसे में उसे अब हटाना काफी दुष्कर काम है। इस काम को शत प्रतिशत हाथों से नहीं किया जा सकता। हमारे पास स्वीयर जेट मशीनों की भी किल्लत है, जिसकी मदद से ड्रेनेज से कीचड सोक कर बाहर निकाला जा सकता है। प्रशसन ने मुंबई, अहमदाबाद और बड़ौदा से ये मशीनें मंगवाने की व्यवस्था की है, जिससे ड्रेनेज की सफाई के काम को गति प्रदान की जा सके।
सूरत के विधायक धीरूभाई गजेरा कहते हैं कि ड्रेनेज सिस्टम को जल्द जल्द से साफ करने की आवश्यकता है क्योंकि यदि सूरत में भारी बारिश हो गई तो कई ईलाके फिर जलमग् हो सकते हैं। प्रशासन को त्वरित कार्यवाही करनी चाहिये क्योंकि सूरत में सितम्बर महीने के अंत तक बारिश होती आई है और इतिहास इस बात का गवाह है कि सूरत में जब-जब विनाशक बाढ़ आई है, वह सितम्बर महीने में ही आई है। धीरूभाई गजेरा की चिंता स्वाभाविक भी है क्योंकि बाढ़ के बाद सूरत शहर की सड़कों और गली-महोल्लों की सफाई तो हो गई है लेकिन अंदर की बात क्या है, यह शहरीजन निरी आंखों से नहीं देख सकते। शहर के पानी की नदी में निकासी का माध्यम समान स्ट्रोम ड्रेनेज सिस्टम का हाल अब भी बेहाल है।